KRISHNA

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Pathalgaon

Friday, May 25, 2012

गडकरी का नारा : कांग्रेस इज प्रॉब्लम, बीजेपी इज सोल्यूशन...

भाजपा कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने नए सिरे से पार्टी के काडर और नेताओं में जोश भरने की कोशिश की। गडकरी का अध्यक्षीय भाषण आगामी लोकसभा चुनाव के इर्दगिर्द था। उन्होंने कहा कई कारणों से हम लक्ष्य तक पहुंचते-पहुंचते रह जाते हैं, लेकिन अगले आम चुनावों में हमें अपनी कमियों पर फतह पाते हुए जीत का परचम लहराना है। उन्होंने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण यूपीए सरकार की विदाई खुद-ब-खुद होगी। ऐसे में देश को एक सशक्त सरकार देने का काम हमें करना होगा। गडकरी ने जुमला उछाला कि कांग्रेस इज प्रॉब्लम, बीजेपी इज सोल्यूशन...।

गडकरी ने वाजपेयी सरकार को याद करते हुए नेताओं में उत्साह भरने का भरसक प्रयास किया। उन्होंने कहा, यूपीए सरकार की तुलना अब एनडीए से हो रही है। देश के लोग मान रहे हैं कि एनडीए के शासन में हमने बेहतर सरकार दी थी। गडकरी ने नारा दिया, कांग्रेस इज प्रॉब्लम, बीजेपी इज सोल्यूशन...।

राष्ट्रपति पद पर खबरदार किया : कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए गडकरी ने कहा, कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने का पैमाना होता है एक परिवार के प्रति समर्पण। बिना गांधी परिवार का नाम लिए उन्होंने कहा, राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी कांग्रेस की ऐसी ही सोच है कि परिवार के प्रति समर्पित व्यक्ति को ही इस सर्वोच्च पद पर बिठाया जाए। इससे सावधान करते हुए कांग्रेस विरोधी दलों को एकजुट कर किसी एक नाम पर एकराय बनाने की कोशिश की जाएगी ताकि राष्ट्रपति पद की गरिमा को कायम रखा जा सके।

पार्टी ने की खेत-खलिहान की बात : महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और बुंदेलखंड के एक हिस्से में अप्रत्याशित सूखे के कारण कार्यसमिति की बैठक में किसान और उससे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा हुई। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सलाह दिया गया कि पश्चिम आधारित विकास का मॉडल छोड़कर केंद्र सरकार को कृषि आधारित विकास का मॉडल बनाना चाहिए ताकि देश का पेट भरने वाले किसान भी बेहतर जिंदगी बसर कर सकें।

कृषि मॉडल को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने पेश किया जिसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा ने समर्थन दिया। किसानों की फसल सब्सिडी को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया ताकि किसान खेती से जुड़े आधुनिक मशीनों की खरीदी भी कर सकें। इससे किसानों की लागत पर होने वाले कुल खर्च का 25 फीसदी कम किया जा सकेगा। चौहान और गौड़ा ने कहा कि कृषि नीति पुनर्विचार का समय आ गया है।

 

 

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